अब से खबरदार रहो भाई
अब से खबरदार रहो भाई
अब से खबरदार रहो भाई ।
गुरु दीन्हा माल खज़ाना राखो जुगत लगाई ।
पाव रति घटने नहिं पावै दिन दिन होत सवाई ।।
क्षमा शील की माला पहनो ज्ञान वस्त्र लगाई ।
दया की टोपी सिर पर दे के और अधिक बन आई ।।
वस्तु पाई गाफ़िल मत रहना हर दिन करो कमाई ।
घट के भीतर चोर लगत हैं बैठे घात लगाई ।।
बाहर ज्ञान रहे सिपाही भीतर भक्ति अधिकाई ।
सुरति ज्योति हर दम सुलगे कस कर तेल चढ़ाई ।।
अब से खबरदार रहो भाई ।
अब से खबरदार रहो भाई ।
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