बुक स्टाल अवलोकन 22 दिसंबर 2024

 बुक स्टाल अवलोकन 22 दिसंबर 2024 

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अपनी सारी वृतिओं, विचारों से लड़कर मैं बुक स्टाल पहुंचा।  कल रविवार को हमारी टीम ने दिल्ली गेट, दरियागंज स्थित महिला हाट बाजार में अपना बुक स्टॉल लगाया। इस स्थान पर हमारा दूसरा बुक स्टॉल था। बहुत छोटी सी जगह में हम लोग काम कर रहे थे और जगह इतनी छोटी थी कि अगर हम सब लोग खड़े हो जाते थे तो किताबें छुप जाती थी। सभी सदस्य काफी अच्छी तरह से अपना काम कर रहे थे और अपनी योग्यता के अनुसार हर सदस्य लोगों से बातचीत कर रहा था और बोध साहित्य को उन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा था। 

इस बाजार में मुख्य रूप से वह विद्यार्थी आ रहे थे जो प्रतियोगी  परीक्षाओं की तैयारी करते हैं या जिन्हें नावेल पढ़ने का शौक है या जो किताबों का कलेक्शन करना चाहते हैं और पुरानी किताबें यहां से ले जाकर अपनी लाइब्रेरी में रखना चाहते हैं। बहुत सस्ते दामों पर नावेल यहां मिल जाते हैं तो उन्ही स्टालों पर ज्यादा भीड़ लगी रहती है। फिर भी हमारे स्टॉल ने अपनी उपस्थिति दर कराई। 

शाम के समय जब हम अपना स्टॉल समेट रहे थे और किताबें पैक कर रहे थे और मैं ऐसे ही गिटार पर टूटी-फूटी धुनें निकाल रहा था, दो पुलिस वाले आए और उनमें से एक ने मेरे हाथ से गिटार बजाने वाला Plectrum (कॉइन) लेकर गिटार बजाने लगे और मैं साथ में दोहे गाने लगा। पुलिस वाले ने कहा कि देखो मैंने कैसा बेकार बजाया लेकिन जब आप गा रहे हैं तो यह बेसुरी धुन भी कितनी अच्छी लग रही है। मैंने उसे कहा कि यही हमारे जीवन में होता है। हमारा पूरा जीवन बेसुरा है लेकिन जब उसमें बोध का प्रकाश आता है तो जीवन सुंदर हो जाता है और मैंने उसे रिक्वेस्ट करी कि आप ये किताबें देखिए जिसमें आचार्य जी किस प्रकार से बोध साहित्य फैला रहे हैं। दूसरा पुलिस वाला भी कहने लगा मैंने इनको सुना है पर अभी तक पढ़ा नहीं है। 

मैंने रिक्वेस्ट करी कि आप एक बार पढ़ लीजिए। सिर्फ एक या दो पेज ही पढ़ लीजिए। एक पुलिस वाले ने संबंध पुस्तक उठाई और जैसे ही उसने पेज खोला  उसकी नजर सीधा क्वोट्स पर गई और युक्ति में जो क्वोट लिखा हुआ था वह उसके दिल को छू गया और उसने उसे सबके सामने जोर से पढ़ा। मैंने क्वोट को रिलेट करके उसकी  रियल लाइफ से जोड़ा जो जम गया। उसने तुरंत पैसे निकाले और बुक ले ली। 

इससे मुझे पता चला कि आचार्य जी की वाणियाँ ही किताबें बिकवा रही हैं बस हमें स्टॉल तक लोगों को लाना है और उनसे एक या दो पेज पढ़वाने हैं। किताबें अपना जादू खुद कर जाएगी। शुरुआत में मुझे लगा कि पुलिस वाले हमसे स्टॉल बंद करवाने के लिए कहने आ रहे हैं।  उनकी  भाषा से लग रहा था कि वे हरियाणा के रहने वाले हैं. इसी प्रकार से अन्य साथियों ने भी अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया और कल भी हमारे स्टॉल से काफी अच्छी संख्या में पुस्तकें निकली। 

धन्यवाद आचार्य जी हमारा संडे, फन डे करने के लिए। वर्ना घर पर ही कीचड में लोट रहा होता।


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