आऊंगा ना जाऊँगा, मैं मरूंगा ना जीऊंगा।

 

आऊंगा ना जाऊँगा, मैं मरूंगा ना जीऊंगा।

गुरा के शबद प्याला हरी रास पियूँगा ||

 

 कोई पूजे मढ़ियाँ ते कोई पूजे गोरां,

 देखो रे बाबा, ये लूट लें हैं चोरा |

 

कोई फेरे माला ते कोई फेरे तस्बीह ,

देखो रे बाबा यह दोनों है तस्फीह ||

 

कोई जावे मक्के ते कोई जावे काशी,

देखो रे बाबा, तोहा गल फांसी।

 

कहत कबीर सुनो मोरी लोई ,

हम ना किसी के हमरा ना कोई ,

हम जो मरेंगे , तो रोये ना कोई।


वो और होंगे जो जिन्हे मौत आएगी बेदम,

निग़ाहें यार से पायी है ज़िन्दगी मैंने,

हम जो मरेंगे , तो रोये ना कोई


जमना(जन्मना) क्या ज्ञान है, मरना क्या है ज्ञान,

इन दोनों से छूटना जो मुक्ति इसको जान |

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